संपादक, अखिलेश द्विवेदी उर्फ़ राजू दुबे/ 9TV समाचार भारत UP बिहार MEDIA
सलेमगढ़ बाजार में स्थित आयुर्वेदिक अस्पताल के लिए अभी तक भवन की व्यवस्था नहीं हो सकी है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
पिछले 56 वर्षों से यह अस्पताल किराए के भवन या अस्थायी व्यवस्था में संचालित हो रहा है। लगातार मांगों और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों के बावजूद अभी तक स्थायी भवन की स्थापना नहीं हो सकी है।
हाल ही में लेखपाल द्वारा प्रस्तावित एक कट्ठा भूमि की पैमाइश कर स्वास्थ्य विभाग में भेजी गई थी, लेकिन वह भूमि आयुर्वेदिक अस्पताल भवन निर्माण के मानक के अनुसार पर्याप्त नहीं पाई गई। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि उपलब्ध भूमि मानक से कम है, जिससे भवन निर्माण की स्वीकृति नहीं मिल सकी।
वही ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सचिवालय यानि नवीन पंचायत भवन के पास अस्पताल के लिए पर्याप्त जमीन खाली है।वही अस्पताल भवन बनाने की मांग की।
पूर्व प्रधान विनोद पटेल का कहना है कि यह अस्पताल पूरे इलाके के लिए बेहद आवश्यक है, लेकिन बुनियादी ढांचे के अभाव में इसकी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
अस्पताल जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।1969 से किराए के भवन में संचालित इस अस्पताल में दवाएं रखने का भी मुकम्मल इंतजाम नहीं है। क्योंकि छत व दीवार में दरारें पड़ गईं हैं। वर्षा होने पर चारों तरफ पानी टपकता है। परिसर में शुद्ध जल की भी व्यवस्था नहीं है।
अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 30 रोगी आते हैं।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि शीघ्र ही मानक के अनुरूप भूमि की व्यवस्था कर भवन निर्माण शुरू कराया जाए। उनका कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
क्षेत्रीय आयुर्वेद एवम यूनानी अधिकारी
दयाशंकर वर्मा का कहना है कि भूमि की समस्या को लेकर वैकल्पिक जगह चिन्हित की जा रही है और जैसे ही उपयुक्त भूमि उपलब्ध होगी, प्रस्ताव दोबारा भेजा जायेगा।तब मानक के अनुरुप पाने पर अस्पताल भवन निर्माण का कार्य जल्दी शुरू कर दी जाएगी।
