एक दिन आ ही गया ख्वाबों में आने वाला–शम्भू सजल

 

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कप्तानगंज नगर की साहित्यिक सामाजिक व सांस्कृतिक संस्था प्रभात साहित्य सेवा समिति की 385 वीं मासिक गोष्ठी सोमवार को कवि विनोद गुप्ता के आवास पर सम्पन्न हुई।

अध्यक्षता इंद्रजीत इंद्र ने किया और संचालन बेचू बीए ने किया। सर्वप्रथम मां शारदे के चित्र पर अथितियों ने पुष्पार्चन किया तदोउपरांत कवि कन्हिया लाल करुण ने शारदे की वंदना से प्रारम्भ किया और अपनी रचना सुनाई-“ना घर बदला,ना आंगन,ना बदला कोई कोना।”
इसके बाद कवि बेनिगोपाल शर्मा ने खूब पढा-“अपने संस्कारों की जननी है हिंदी, अपने विचारों की जननी है हिंदी”इसके बाद कवि आनंद कृष्ण त्रिपाठी ने सुनाया दीपक की लव हिल हिल कहती,आया संयोजनकवि नूरुद्दीन नूर ने खूब सुनाया-
“करना क्या था हमें और क्या कर गए-हम मोहब्बत में उनसे वफ़ा कर गये।इसके बाद अर्शी बस्तवी ने पढ़ा-बर्क का रुख था आशियाने पर,पर खुदा था हमें बचाने पर।”खड्डा से आये कवि शम्भू सजल ने भी खूब सुनाया”एक दिन आ ही गया ख़्वाबों में आने वाला-रोज़ रातों की मेरी नींद चुराने वाला।” इसके बाद मेजबान विनोद गुप्ता ने यह सुना या- “आंखों की वो शरारत गुस्ताखियां लबों की दिल ले गया हमारा मासूम से वो चेहरा।शायर इम्तियाज़ समर ने यह सुनाया-“हम खंजर न सूल रखते हैं।प्यार वाला वसूल रखते हैं।”
इसके बाद संचालन कर रहे कवि बेचू बीए ने यह गीत माँ को समर्पित सुनाई-“जब जब रोअनी लरकइन में,माई हो दूध पीअवलू “मेजबान की नतनी अराधिता कुमारी ने भी कविता पाठ की।अंत मे अध्यक्षता कर रहे कवि इंद्रजीत इंद्र ने वीर रस की कविता सुनाई तो श्रोताओं ने तालियां बजा कर स्वागत कि या-“सुरुवे से दोगलापन कइल, अबकी जो बात कटि जईहे
त चापब सभे कराची तक
छाती तुहार फाटि जंहिहें।इस मौके पर हरेराम गुप्त, शौरजित,शत्रुध्न निषाद,अंशु, आदि मौजूद रहे।

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