संपादक अखिलेश कुमार द्विवेदी 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार और नकदी देने की घोषणाओं पर गंभीर चिंता जताई।
शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार से मुफ्त में राशन और नकदी मिलने से लोग काम करने को को तैयार नहीं हैं।
जस्टिस बी. आर. गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सरकार और राजनीतिक दलों की मुफ्त योजनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय विकास के लिए लोगों को मुख्यधारा में शामिल करने के बजाए, क्या हम परजीवियों का एक वर्ग बना रहे हैं? जस्टिस गवई ने कहा कि दुर्भाग्य
से, इन मुफ्त उपहारों के कारण, राजनीतिक दलों द्वारा जो चुनावों से ठीक पहले घोषित किए जाते हैं, जैसे हालाडकी बहन, लाडली बहन और इसी तरह अन्य मुफ्त योजनाओं के चलते लोग काम करने को तैयार नहीं हैं।
उन्होंने आगे कहा कि लोगों को कमाए बगैर मुफ्त राशन और पैसे मिल रहे हैं, जिसके चलते वे काम नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि हम उनके प्रति
चुनावों से ठीक पहले मुफ्त में चीजें देने की घोषणाओं पर कोर्ट ने उठाया सवाल
कहा, लोगों को मुख्यधारा में शामिल करने के बजाए क्या हम परजीवियों का एक वर्ग बना रहे?
(लोगों) आपकी (सरकार) चिंता की सराहना करते हैं, लेकिन क्या यह बेहतर नहीं होगा कि उन्हें स
माज की मुख्यधारा का हिस्सा बनाया जाए और राष्ट्र विकास में योगदान करने को प्रेरित किया जाए?
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी शहरी क्षेत्रों में बेघर व्यक्तियों के आश्रय के अधिकार से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है।
