पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का हमला अब पत्रकार नहीं है सुरक्षित ती आमजन का क्या हाल होगा?
संपादक अखिलेश कुमार द्विवेदी 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में महिला पत्रकार सोनी कपूर के साथ हुई अभद्रत का मामला अब तूल पकड़ चुका है।
न केवल इस घटना ने राजधानी की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी है।
घटना रविवार देर शाम की बताई जा रही है, जब पत्रकार सोनी कपूर वेदांत अस्पताल में भर्ती किसी मरीज से मिलने जा रही थीं। सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र में मौजूद थीं।
इससे दौरान कुछ अज्ञात लोगों ने उनके साथ न सिर्फ
पीड़ित महिला पत्रकार सोनी कपूर
आरोपी
अखिलेश यादव ने ट्वीट कर सरकार पर साधा निशाना
इस खानाले में जब मीडिया के जहिर जानकारी बाहर आई, तब पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश वादा ने (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट करते हुए कहा- लहानऊ जैसे शहर में महिला पत्रकार के साथ हुई शर्मनाक घटना इस बात का संकेत है।
कि भाजपा सरकार में महिलाओं की सुच्चा सिर्फ कागजों तक सीमित है। FIR तक दर्ज कराने में घंटों की देतै ये है यूपी में ‘बेटी बचाओ की सच्चाई आहोंने यह भी सवाल उद्याया कि जब पत्रकार सुरचित नहीं है, तो आम वालिकों की सुरवा की क्या गारंटी है?
अभद्रता की, बल्कि उन्हें डराने धमकाने की कोशिश भी की। पीड़िता ने तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क किया, लेकिन चौकाने वाली बात यह सही कि पुलिस ने बद्धक्रदर्ज करने में टालमटोल शुरू कर दिया। पत्रकार
सनी कपूर ने सुशांत गोल्फ सिटी थाने के लगाये चकर, लेकिन नहीं मिला इंसाफ पीड़िता महिला पत्रकार सोनी कपूर के अनुसार, उन्होंने कई बार थाने का रुख किया, लेकिन एफआईआर दर्ज करने के बजाय उन्हें जांच चात
ही है और
उपलब्ध नहीं हैं जैसे बहाने सुनने को मिले।
यह
लापरवाही
तब और गंभीर हो जाती है जब पीड़िता खुद एक जानी-मानी पत्रकार है, जिनकी कई बार शासन प्रशासन तक सीधी पहुंच रही है।
प्रशासन की चुप्पी और पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल घटना के उजागर होने के बाद देर रात अडूक दर्ज की गई लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि अगर यह मामला मीडिया में न आता, तो क्या एफआईआर दर्ज भी होती? स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका को लेकर लगातार आलोचना हो रही है।
राजनीतिक गलियारों में हलच
ल,
महिला संगठनों ने जताई नाराजगी यह मामला अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। कई महिला संगठनों ने इसे लेकर आक्रोश जताया है और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। समाजवादी पार्टी के साथ-साथ कांग्रेस और कुछ स्वतंत्र पत्रकार संगठनों ने भी सत्ताधारी दाल को कठघरे में खड़ा किया है।
पुलिस का बयान- जांच जारी है लखनऊ पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया को बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। हालांकि अब तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
यह घटना एक बार फिर से यह सोचने को मजबूर कर रही है कि उत्तर प्रदेश में महिलाएं, पत्रकार और आम नागरिक कितने सुरक्षित है? सवाल सिर्फ एक ब्रहुक का नहीं, सिस्टम की संवेदनशीलता और जवाबदेही का है।
