लातेहार:जिले में नक्सलियों का एक मात्र सुरक्षित ठिकाना दौना-करमखाड़ आखिरकार उनके लिए कब्रगाह बन गया. रविवार देर रात से सोमवार सुबह तक पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई नक्सलियों के ताबूत में आखिरी कील साबित हुई. बूढ़ा पहाड़ के कॉरिडोर में बचे दो नक्सलियों में से एक नक्सली मनीष यादव मारा गया. जबकि दूसरा कुंदन खरवार पुलिस के हत्थे चढ़ गया. *इससे बूढ़ा पहाड़ के इलाके से नक्सलियों का खात्मा हो गया*.दरअसल, लातेहार एसपी कुमार गौरव को सूचना मिली थी कि भाकपा माओवादी नक्सली कुंदन खरवार और मनीष यादव दौना-करमखाड़-मेडरुआ जैसे इलाकों में पिछले चार-पांच दिनों से भ्रमणशील है. *सूचना के बाद पुलिस नक्सलियों के चहलकदमी पर फोकस कर रही थी.* इसी बीच एसपी कुमार गौरव को गुप्त सूचना मिली कि रविवार की रात मनीष यादव और कुंदन खरवार दौना और करमखाड़ गांव के बीच स्थित जंगल में एक घर में रुके हुए हैं. एसपी के निर्देश पर पुलिस और सुरक्षा बलों की टीम ने घेराबंदी करते हुए चिन्हित घर को चारों ओर से घेर लिया.*पुलिस ने दोनों नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा*, जिस पर मनीष यादव ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. जवाब में पुलिस ने
भी फायरिंग शुरू की और मनीष यादव मारा गया. जबकि हथियार छोड़कर घटनास्थल से भाग रहे कुंदन खरवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. घटनास्थल से दो X-95 राइफल भी बरामद हुए हैं.*इस वजह से शिकंजे में आया मनीष यादव* बताया जाता है कि माओवादी मनीष यादव का ससुराल दौना गांव में ही स्थित है. मनीष यादव पिछले कई वर्षों से इस इलाके में सक्रिय था. यह भी बताया जाता है कि मनीष यादव इश्क मिजाज का व्यक्ति था. जिसके चलते गांव में आना-जाना लगा रहता था. रविवार की रात भी वह दौना गांव पहुंचा था, जहां उसका सामना पुलिस से हो गया.*क्षेत्र में बना रखा था दहशत* लातेहार जिले में भले ही नक्सलियों को पुलिस ने काफी कमजोर बना दिया था. लेकिन महुआडांड़ समेत आसपास के इलाके में नक्सली कुंदन खरवार, मनीष यादव आदि दहशत बनाए हुए था.नक्सलियों के द्वारा अक्सर किसी न किसी हिंसक घटना को अंजाम देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जाती थी. कुछ दिन पहले ही इन्हीं नक्सलियों के द्वारा पुल निर्माण कार्य में लगे एक व्यक्ति की पिटाई भी कर दी गई थी.काफी कम संख्या होने के बावजूद नक्सलियों का दहशत कायम था. हालांकि पुलिस के द्वारा इनके खिलाफ पिछले कई वर्षों से लगातार अभियान भी चलाया जा रहा था, लेकिन हर बार पुलिस को चकमा देकर नक्सली फरार हो जा रहे थे. इस बार पुलिस को सफलता हासिल हुई और उनके साम्राज्य का अंत हो गया.*छोटू खरवार की हत्या के बाद संगठन की बागडोर संभाल थे* लगभग 6 महीने पहले माओवादी कमांडर छोटू खरवार की हत्या संगठन में ही विद्रोह के बाद उसके अपने साथियों ने कर दी थी. इस घटना के बाद माओवादी संगठन का बागडोर कुंदन और मनीष यादव ही संभाल रहे थे. बूढ़ा पहाड़ के कॉरिडोर में दोनों नक्सली संगठन को चला रहे थे. हालांकि उनके पास सदस्यों की संख्या काफी कम थी.कुंदन और मनीष लगातार इस प्रयास में थे कि संगठन में नए सदस्यों को जोड़ा जाए और संगठन को फिर से मजबूत बनाया जाए. लेकिन ग्रामीणों का सपोर्ट इन्हें पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा था. इसके बावजूद दोनों नक्सली माओवादी संगठन की उपस्थिति दर्ज कराकर लेवी वसूलने में सफल हो रहे थे.
