फिरोज अंसारी अश्क
लक्ष्मीगंज कुशीनगर 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA
बताते चले, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी प्राईमरी स्कूल को बन्द करने पर लगी हुई है। अब तक उत्तर प्रदेश में लगभग 2700 स्कूल बन्द हो चुके है और उत्तर प्रदेश सरकार 5000 सरकारी स्कूलों को बन्द करने का मन बना लिया है। अब तक पूरे देश में 2014 से 2025 के बीच 89,441 से ज्यादा सरकारी स्कूल बन्द हो चुके है। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 60.09% सरकारी स्कूल बन्द हुए है जिसको उच्च न्यायालय ने भी मंजूरी दे दी है। सरकार सरकारी स्कूल बन्द होने के पीछे नामांकन में गिरावट को जिम्मेदार ठहरा रही है।
मगर इसके पीछे सरकार अपनी कमियों को छुपाने में लगी है। जिसका प्रमुख कारण है कि, पुराना पाठ्यक्रम, स्कूल में भरपूर सुविधाओं का नही होना, सक्षम प्रशिक्षकों की कमी, छात्र-शिक्षक अनुपात और तकनीकी सुविधाए।
सरकारी स्कूल में उपरोक्त संसाधनों की कमी को सरकार दूर कर दी होती तो शायद स्कूल बन्द करने की नौबत ही नही आती। पूरे देश की आबादी 140 करोड़ और वही उत्तर प्रदेश की आबादी 24 करोड़ है और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुचारु रूप चलाने में इन्हीं जनता का हाथ है। सरकारी स्कूलों को बन्द करने के पीछे निजी स्कूलों को प्रोत्साहन और शिक्षा का व्यापारी करण है।
यदि उत्तर प्रदेश सरकार सरकारी स्कूलों को बन्द कर रही है तो उस टैक्स को भी लेना बन्द करें जो शिक्षा शुल्क के नाम पर जनता से लिया जाता है। उत्तर प्रदेश की जनता सरकार को टैक्स के रूप में जो धन देती है, वह पैसा है जो उत्तर प्रदेश की जन
ता अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा सरकार को देती है तो सरकार शिक्षा के बजट को क्यों नही बढ़ा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार कुम्भ मेलें पर, कावर यात्रा पर, मन्दिर मस्जिद पर, धार्मिक आयोजनों पर सरकारी धन का दुरूपयोग क्यों कर रही है।
धार्मिक सिर्फ एक आस्था का प्रतीक है इससे ज्यादा कुछ नही है। धार्मिक होने का जो ज्ञान प्राप्त होता है उसका भी आधार है शिक्षा। उसके बाद भी उत्तर परदेश सरकार सरकारी स्कूलों को तबातोड़ बन्द करने पर लगी है। क्या उत्तर सरकार बच्चों को शिक्षा से दूर रखकर बिकलांग बनाना चाहती है, क्या सरकार चाहती है कि, प्रदेश के बच्चे अन्धविश्वास में जिए ऐसे तमाम प्रश्न है योगी सरकार से जो प्रदेश की जनता जानना चाहती है। शायद सरकार भी नही चाहती है कि, शिक्षा का स्तर बेहतर हो यही कारण है कि, सरकारी स्कूलें बन्द होती जा रही है और शराब की दुकानें रोजाना खुल रहीं है। सरकार भी नही चाहती है कि, गरीब तबके लोगों के बच्चे पढ़ें इसका मूल कारण है कि, यदि गरीब तबके के बच्चें पढ़ लिख लेंगें तो सवाल भी खड़ा करेंगें और फिर सरकार का झण्डा कौन उठायेगा। यदि सरकार शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए बजट ज्यादा देती तो शायद इन प्राइमारी स्कूलों को विलय होने पर रोका जा सकता है।यदि योगी सरकार का यही रवैया रहा तो आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा को हार का मुँह देखने से कोई नही रोक सकता है। उक्त बाते भारतीय किसान यूनियन (जनकल्याण) की जिला इकाई कुशीनगर के जिलाध्यक्ष व पूर्व लोकसभा प्रत्याशी 65, कुशीनगर संसदीय क्षेत्र रामचन्द्र सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अवगत कराए है।
