.सुदामा देवी की 17 वीं पुण्यतिथि पर साहित्यकारों का लगा जमावड़ा

सह संपादक वैभव तिवारी 

कप्तानगंज नगर के कवि व पत्रकार बेचू बीए की माता की 17 वी पुण्यतिथि शनिवार की शाम को मां सुदामा देवी कॉम्प्लेक्स पर एक काव्य गोष्ठी का आयोजन आनन्द कृष्ण त्रिपाठी की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। मुख्य अतिथि दिनेश यादव व विशिष्ठ अतिथि हरेराम गुप्त व समिउद्दीन उर्फ ढोंढा राइन रहे।

 सर्व प्रथम अध्यक्ष मुख्य अतिथि व मेजबान बेचू बीए द्वारा मां शारदे व सुदामा देवी के चित्र पर पुष्पांजलि व धूप अगरबत्ती जलाया।तदोपरान्त मां शारदे की वंदना कवि अश्विन दुबे ने सुना कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। 

  शायर इम्तियाज अहमद ने समर ने सुनाया

 मां को आंखों में रखोगे रोशनी बढ़ जाएगी 

लो दुआएं मां की तो जिंदगी बढ़ जाएगी।

 इसके बाद विनोद गुप्ता ने सुनाया 

 मैं कितना गम छुपा के मुस्कुराता हूं हजारों में

 यह सीना चीर कर सबको दिखाना है बड़ा मुश्किल। इसके बाद सुनील कुमार ने यह सुनाया

 बातें बुजुर्गों का जब से नागवार लगा है

 बिखरने सच में तभी से परिवार लगा है ।

बेनी गोपाल शर्मा ने खूब सुनाया

 मुख से बिलबिलाती जिंदगी आसान है क्या

 चारों तरफ प्रकाश है शमशान है क्या?

 इसके बाद मेजबान बेचू दिए ने मां पर यह रचना सुना कर सबकी आंखें नम कर दी ।

सो रही चीरनींद में अपना ना जगाओ

 ख्वाब की दुनिया में फिर से मत बुलाओ।

 इसके अलावा फिरोज अश्क ने मां पर -मां का आला मकाम रब ने बनाया नहीं होता/मां के कदमों तले जन्नत को सजाया नहीं होता/ खूबसूरत रचना सुनाकर बाहवाही लूटी। नूरुद्दीन नूर ने भी मां को याद करते हुए रचना प्रस्तुत किया। इसके अलावा अमजद अली डॉक्टर नर्वदा सिंह अरमान मंसूरी कन्हैया लाल करुण ने रचना पाठ किया ।

अध्यक्षता कर रहे हैं आनंद कृष्ण त्रिपाठी ने रामचरितमानस पर आधारित रचनाएं सुन कर गोष्ठी को भक्ति मय किया वहीं इंद्र जीत इंद्र ने भी पाकिस्तान को दहाड़ते हुए अच्छी रचना प्रस्तुत किया ।

अंत में आयोजन कर्ता ने सबका

आभार व्यक्त किया ।

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