9TV समाचार भारत UP बिहार MEDIA
संपादक अखिलेश द्विवेद
भारत-नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा को गुरुवार को सील कर दिया गया है। इसे लेकर नेपाल सरकार ने सीमा पर नोटिस चस्पा कर दी है। नोटिस में स्पष्ट है कि नेपाल सरकार का गुरुवार को बजट प्रस्तुत होने वाला है।ऐसे में सुरक्षा कारणों को देखते हुए सीमा को सील कर दिया गया है। भारत से नेपाल में वाहनों का प्रवेश वर्जित होते ही हजारों लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सुबह से ही नेपाल जाने वाले वाहनों की कतार सीमा पर लग गई है।
भारत और नेपाल के बीच स्थित 1,751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा सिर्फ एक भौगोलिक रेखा नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रिश्तों की जीवनरेखा है। सीमा सील होने से झुलनीपुर बॉर्डर ही नहीं बल्कि देश के अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी व्यापक प्रभाव छोड़ गया।
इस अस्थायी बंदी का सीधा असर व्यापार, पर्यटन, रोजगार, पारिवारिक जीवन, सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। इस कार्रवाई से उत्तर प्रदेश के लखीमपुर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, कुशीनगर के साथ ही उत्तराखंड और बिहार की सीमाओं पर काफी हलचल देखी जा रही है।झुलनीपुर में अफरा-तफरी का माहौल
नेपाल द्वारा भारत के साथ सभी सीमाओं को सील करने की घोषणा जैसे ही सार्वजनिक हुई झुलनीपुर बॉर्डर पर भारी भीड़ जमा हो गई। सैकड़ों वाहन फंसे रहे, जिनमें व्यापारिक ट्रक, पर्यटक वाहन और स्थानीय परिवहन शामिल थे। पैदल यात्री सीमावर्ती गांवों से दोनों ओर जाते नजर आए।
सुरक्षा को लेकर की गई कार्रवाई
नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों ने यह निर्णय भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में संदिग्ध पाकिस्तानी और बांग्लादेशी घुसपैठ की आशंका के चलते लिया। जानकारी के अनुसार, नेपाल के तौलिहवा, बुटवल और भैरहवा क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों से बाहरी संदिग्धों की गतिविधियाँ देखी गईं, जिससे नेपाल सरकार ने सतर्कता बढ़ाई और एक दिन के लिए सीमा बंद कर दी।
स्थानीय व्यापारी सुरेश अग्रवाल बताते हैं कि हम रोज झुलनीपुर बॉर्डर से लगभग 10 लाख रुपये का माल भेजते हैं। आज पूरा व्यापार ठप पड़ा है। जितनी देर यह स्थिति बनी रही, उतना ही बड़ा नुकसान होगा। नेपाल सेआने वाले ट्रांसपोर्टर रमेश भण्डारी का कहना है कि हम भारत से अनाज और दवाइयाँ लेकर जा रहे थे। सुबह से ट्रक सीमा पर खड़ा है, लेकिन न कोई आदेश मिल रहा है, न कोई सुविधा।
शेयर
सीमा पर गाड़ियों की लंबी कतारें।
दैनिक व्यापार में गिरावट
भारत-नेपाल सीमा के जरिए हर दिन करोड़ों रुपए का व्यापार होता है। झुलनीपुर, सोनौली, रक्सौल, भड़सार, जोगबनी और बनबसा जैसे सीमावर्ती व्यापारिक केंद्रों पर नेपाली खरीदारों की निर्भरता से स्थानीय व्यापारी अपनी जीविका चलाते हैं। सीमा बंद होने के कारण नअपनी जीविका चलाते हैं। सीमा बंद होने के कारण न सिर्फ दुकानदारों की आमदनी रुकी, बल्कि ट्रकों में लदे फल, सब्जी, दवाइयाँ और अन्य सामानों के सड़ने का भी खतरा उत्पन्न हुआ।
पढ़िए इससे पहले कब हुआ था बॉर्डर सील
2024 : अप्रैल माह में नेपाल के उपचुनाव से पहले भारत-नेपाल सीमा को सील किया गया था। इससे बाहरी हस्तक्षेप और अवैध गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी।अपनी जीविका चलाते हैं। सीमा बंद होने के कारण न सिर्फ दुकानदारों की आमदनी रुकी, बल्कि ट्रकों में लदे फल, सब्जी, दवाइयाँ और अन्य सामानों के सड़ने का भी खतरा उत्पन्न हुआ।
इससे पहले बंद हुआ था सीमा
2024 : अप्रैल माह में नेपाल के उपचुनाव से पहले भारत-नेपाल सीमा को सील किया गया था
। इससे बाहरी हस्तक्षेप और अवैध गतिविधियों पर रोक लगा दी गई थी।
2020-2021 : कोरोना महामारी को रोकने के लिए
नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पूरी तरह बंद कर दिया था।
2015 : नेपाल के नए संविधान के विरोध में मधेशी आंदोलन, और भारत द्वारा कथित तौर पर अनौपचारिक नाकेबंदी।
