प्राचीन धर्मसमधा पोखरा का अस्तित्व संकट में मिट्टी डाल कर भरा जा रहा है पोखरा, प्रशासन मौन, लोगों में आक्रोश

 

फिरोज अंसारी अश्क
लक्ष्मीगंज कुशीनगर 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA 

रामकोला नगर के पडरौना रोड स्थित प्राचीन धर्मसमथा मंदिर का ऐतिहासिक पोखरा आज विलुप्ति के कगार पर पहुंच गया है। पूर्वांचल के इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल की पहचान रहे इस पोखरे को राजा मदनपाल सिंह ने अपनी पुत्री के विवाह के समम खुदवाया था।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, राज पुरोहित ने राजकुमारी की जन्म कुंडली में एक विचित्र भोग देखा था। उन्होंने बताया था कि सुहागरात में एक बाथ दूल्हे की जान ले लेगा। इसी कारण राजा ने अपनी पुत्री की सुरक्षा के लिए महल के साथ इस पोखरे का निर्माण करवाया था।

वर्तमान में जहां सरकार अमृत सरोवर योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर नए तालाबों का निर्माण कर रही है, वहीं यह प्राचीन पोखरा उपेक्षा का शिकार है। मंदिर

के पश्चिमी भाग का पोखरा सफाई के अभाव में धीरे-धीरे भर रहा है। नगर के कुछ दानवीरों की ओर से भी पोखरे में मिट्टी डाली जा रही है जिससे इस सैकड़ों वर्ष पहले खोदा गया ऐतिहासिक पोखरे का

अस्तित्व खतरे में ही। स्थानीय नागरिक इस स्थिति से

चिंतित हैं। पूर्व प्रधान प्रतिनिधि चंद्रिका खरवार, पूर्व सभासद उत्तम खरवार, त्रिलोकी नाथ मिश्रा, रमेश प्रसाद और मुजा शर्मा सहित कई लोगों ने प्रशासन से उत्काल कार्रवाई की मांग की है जिससे प्राचीन पोखरे का अस्तित्व बच सके। चेयरमैन प्रतिनिधि सतीश

चौधरी का कहना है कि पोखरे में मिट्टी भराई नगर पंचायत द्वारा नहीं, बल्कि जनसहयोग से हो रही है। वहीं धर्मसमधा मंदिर की ट्रस्टी और नायब तहसीलदार कप्तानगंज एकता त्रिपाठी ने कहा कि वे स्थानीय लेखपाल से इस मामले की जांच करवाएंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *