डॉक्टर इम्तियाज समर की शायरी में परिपक्वता की झलक

 

फिरोज अंसारी अश्क
लक्ष्मीगंज कुशीनगर 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA 

जनपद कुशीनगर के कप्तानगंज नगर के मशहूर शायर डॉक्टर इम्तियाज समर कुशीनगर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। उनकी किताब मोहब्बत का समर एक अलग पहचान बना चुकी है।

‘मोहब्बत का समर’ शायर डॉ. इम्तियाज ‘समर’ की गजलों का संग्रह है। पुस्तक की गजलें पाठकों को प्रभावित करने में सक्षम हैं। कथ्य एवं शिल्प दोनों की दृष्टि से शायरी में परिपक्वता झलकती है।

शायरी के तमाम खूबसूरत पहलू पाठकों के समक्ष उजागर होते हैं। गजल आज के दौर की अत्यन्त लोकप्रिय विधा है। दो मिसरों में पूरी बात समेट लेने का हुनर इसी विधा के पास है। हर शायर का अपना एक अलग अंदाज और रंग होता है।

, जिससे उसकी विशेष पहचान बनती है। अपने इस गजल-संग्रह के माध्यम से डॉ. इम्तियाज ‘समर’ संजीदा और गजल-विधा की पर्याप्त जानकारी रखने वाले गजलकार रूप में पाठकों के समक्ष आते हैं। संकलन की रचनाएं गजल की कसौटी पर खरी उतरती हैं। गजल संग्रह के कुछ उल्लेखनीय अंश ‘मचलने लगा है।

दिल अब खुशी से/मोहब्बत हमें हो गयी है किसी से।’ कितनी खुशियों ने दिल पे दस्तक दी/इक तुम्हारे करीब आने से।’ आज के सियासी हालात का चित्रण-‘मुकद्दर के सिकन्दर हो गये हैं/जो दरिया थे समन्दर हो गये हैं।

‘ आज के दौर का इंसान- ‘बिक गया इंसाफ सिक्कों के एवज/मुंसिफों के लब पे ताले पड़ गये।’ आम आदमी का चित्रण ‘कांधों पे अपने टाट का बिस्तर लिये हुए देखो वो जा ररहा है कोई घर लिये हुए।’ गजलों में कहीं-कहीं कुछ दोष भी दृष्टिगत होते हैं।, यथा- ऐबे-तनाफुर (स्वरदोष-मिसरे में किसी शब्द के अंतिम अक्षर की उसके बाद वाले शब्द के पहले अक्षर से समानता), तकाबुले रदीफ (मतले के अलावा किसी शे’र के दोनों मिसरों का अंत समान स्वर पर होना) आदि। कुछ गजलों में भरती के शब्द भी आए हैं।

इसके अतिरिक्त पुस्तक में रह गयी प्रूफ संबन्धी त्रुटियों के कारण कुछ स्थानों पर व्याकरण एवं वर्तनीगत अशुद्धियां भी परिलक्षित होती हैं, यथा- बेहीसी, मुशिफ, पुछिए, ऊर्दू, दिजिए, ख्याल, रूत्बा आदि। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ‘मोहब्बत का समर’ पठनीय एवं सराहनीय गजल संग्रह

पुस्तक समीक्षा प्रस्तुत है मुहब्बत की बात करते हुए अशआर-

अजीत शर्मा आका

पुस्तक : मोहब्बत का समर, शायरः डॉ. इम्तियाज समर, ।

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