यूजीसी के समर्थन में भारतीय कुर्मी महासभा ने सौंपा प्रदेश व्यापी ज्ञापन संवाददाता कुशीनगर

 

संवाददाता कुशीनगर
फिरोज अंसारी अश्क 9 टीवी समाचार भारत UP बिहार MEDIA 

प्रधानमंत्रीयू.जी.सी.अधिनियम- 2026 शीघ्र लागू किए जाने के संबंध में।

पडरौना/ कुशीनगर। भारतीय कुर्मी महासभा कुशीनगर के जिलाध्यक्ष रामनरेश पटेल के नेतृत्व में 13 फरवरी दिन शुक्रवार को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर भारतीय कुर्मी महासभा के पदाधिकारियों और कुर्मी समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री के नाम प्रशासनिक अधिकारी राजेश श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा है समाज के लोगों ने विनम्रता पूर्वक अवगत कराया है कि विगत कई वर्षों से देश के उच्चतर शैक्षणिक संस्थाओं में एस सी/एस.टी एवं ओबी.सी. के छात्र-छात्राओं तथा कर्मचारियों के साथ सामंतवादी मानसिकता के लोगों के द्वारा लगातार जातिगत भेदभाव किया जाता रहा है। जिसको कारण आरक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओं एव कर्मचारियों का निरंतर उत्पीड़न होता रहा है। कई बार सामंतवादियों द्वारा जातीय उत्पीड़न की चरम सीमा लांघने पर एस सी./एस.टी. एवं ओ.बी.सी. के लोगों को विभिन्न संस्थाओं में हतोत्साहित होकर अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। जिसको ध्यान में रखकर माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने देश के उच्चतर शैक्षणिक संस्थानों में यूजीसी अधिनियम-2026 लागू करने की घोषणा किया। जिसके द्वारा देश के सभी उच्वतर शैक्षणिक संस्थानों के विभिन्न विभागों में सभी वर्गों को समान पदोन्नति का अवसर प्राप्त हो तथा भविष्य में किसी का जातिगत भेदभाव के कारण उत्पीड़न न किया जा सके। परिणाम स्वरुप सामंतवादी मानसिकता वो अमुक लोगों द्वारा यूजीसी अधिनियम-2026 का घोर विरोध किया गया और एक पीआईएल दाखिल कर मामले को माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन करा दिया गया। यूजीसी अधिनियम-2026 का घोर विरोध कर मनुवादी ताकतों ने यह जता दिया कि आजादी के 78 वर्ष बाद नी एससी/एस.टी. और ओ.बी.सी. के छात्र-छात्राओं एवं कर्मचारियों का जातिगत भेदभाव कर शोषण किया जाता रहेगा और देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में मनुवादी विचारधारा इसी प्रकार पुष्पित- पलवित होती रहेगी।इसके साथ ही साथ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, को दिए जाने वाले आरक्षण ई.डब्ल्यू. एस. कोटा 14
जनवरी 2019 से लागू होने के बाद से ही ओबी.सी. के 27 परसेंट आरक्षण को 17-18% तथा एस.सी. एस. टी. के 22.5% आरक्षण को 15-16% आरक्षण पर सीमित करके ई.डब्ल्यू.एस. को लगभग 20-21% आरक्षण एक वर्ग विशेष को अवैध तरीके से दिया जा रहा है जो कि विभिन्न संस्थाओं एवं विभागों में ओ.बी.सी. एवं एस.सी./एस.टी. के आरक्षण पर दिन-दहाड़े डकैती है।महोदय विगत कुछ वर्षों से देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में नौकरियों की प्रतियोगात्मक परीक्षाओं की लिखित परीक्षा में ओबीसी एवं एससी/एसटी के अभ्यर्थियों द्वारा गैर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों से बेहतर अंक प्राप्त करने के बावजूद इंटरव्यू में एससीएसटी और ओबीसी के अभ्यर्थियों को “नॉट फाउंड सूटेबल(एन फ़ स) लिखकर के फेल कर दिया जाता है। जबकि लिखित परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने के बावजूद गैर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में अधिकतम नबर देकर चयनित कर लिया जाता है। यह पक्षपात ओबीसी एवं एससी/एसटी के साथ निरंतर किया जा रहा है। जिससे सरकार की भी छवि धूमिल हो रही है।महोदय 2018 से लैटरल एंट्री द्वारा आई ए एस की हो रही मर्ती में अभी तक एक भी एससी/एसटी और ओबीसी का अभ्यर्थी चयनित नहीं हुआ है। यह उन प्रतियोगी परीक्षार्थियों के साथ-साथ एससी/एसटी एव ओमीसी के अभ्यर्थियों के साथ घोर अन्याय है, जो संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से चयनित होने का इंतजार कर रहे हैं। यहा पर भी एससी/एसटी और ओबीसी के साथ जातिगत भेदभाव किया जा रहा है। अतः देश के प्रधानमंत्री से भारतीय कुर्मी महासभा उत्तर प्रदेश निम्नलिखित्त मांग करती है कि देश के विभिन्न उच्चतर शैक्षणिक संस्थानो में एस.सी./एस.टी. एवं ओ.बी.सी. के साथ हो रहे जातिगत भेदभाव के उत्पीड़न को समाप्त करने के लिएतत्कालयूजीसीअधिनियम-2026 लागू किया जाए।
देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों एवं नौकरियों में ईडब्ल्यूएस आरक्षण कोटा शीध समाप्त करते हुए ओ.बी.सी. के 27% तथा एस.सी/एस.टी. के 22.5% संवैधानिक रूप से प्रदत्त आरक्षण को समुचित रूप से आपूर्ति कराना सुनिश्चित किया जाए।किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में नॉट फाउंड सूटेबल लिखकर फेल करने की प्रक्रिया को तत्काल समाप्त करते हुए इंटरव्यू देने वाले सभी अभ्यर्थियों को कम से कम अंक साक्षात्कार में अवश्य प्रदान किया जाए।लैटरल एंट्री द्वारा हो रही आई ए एस की भर्ती प्रक्रिया को तत्काल बंद करके संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं के माध्यम से आई ए एस का चयन किया जाए।
महोदय जी यदि भारतीय कुर्मी महासभा उत्तर प्रदेश की मांगे पूरी नहीं हुई तो भारतीय कुर्मी महासभा अन्य सामाजिक संगठनों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी। जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी केंद्र एवं प्रदेश सरकार की होगी।इस मौके पर युवा जिलाध्यक्ष अशोक सिंह पटेल ,राम प्रवेश पटेल जिला सचिव ,बेसिंदर सिंह पटेल ,विक्रम पटेल, योंगेद्र पटेल,अनुरुद्ध पटेल,दर्जनों पदाधिकारी उपस्थित रहें।

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